उत्तराखंड

शिक्षण पद्धति में सुधार: उत्तराखंड में अब किताबों से ज्यादा खेल और कहानियों पर रहेगा जोर।

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षा का स्वरूप बदलने जा रहा है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने कक्षा 5वीं तक के बच्चों के लिए ‘पंचकोष विकास सिद्धांत’ को लागू करने की बड़ी सिफारिश की है। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तैयार यह नया पाठ्यक्रम 3 से 8 वर्ष के बच्चों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है, जिससे रटंत विद्या का बोझ खत्म होगा।

क्या है पंचकोष विकास सिद्धांत?

भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित इस मॉडल में बच्चे के व्यक्तित्व को पांच स्तरों पर विकसित किया जाता है। इसका उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चे को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना है।

  1. अन्नमय कोष: खेलकूद और सही पोषण के जरिए शारीरिक विकास।

  2. प्राणमय कोष: योग और गतिविधियों से जीवन शक्ति व स्वास्थ्य को मजबूत करना।

  3. मनोमय कोष: भावनाओं पर नियंत्रण और आत्मविश्वास बढ़ाना।

  4. विज्ञानमय कोष: तर्कशक्ति, जिज्ञासा और बौद्धिक क्षमता का विकास।

  5. आनंदमय कोष: नैतिक मूल्य और राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना।

स्थानीय परिवेश और संस्कृति से जुड़ेगी पढ़ाई

SCERT के राज्य समन्वयक रविदर्शन तोपाल के अनुसार, नई पाठ्यचर्या रूपरेखा (SCF) में उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय लोककथाओं और पारंपरिक खेलों को शामिल किया गया है। इससे राज्य के 11,580 प्राथमिक विद्यालयों के लगभग 3 लाख से अधिक छात्र अपनी मिट्टी और संस्कृति से जुड़ते हुए शिक्षा ग्रहण करेंगे।

शिक्षकों को दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग

SCERT की निदेशक बंदना गर्ब्याल ने स्पष्ट किया कि इस नीति को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी शिक्षकों और क्षेत्रीय अधिकारियों की होगी। जल्द ही शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और नई शिक्षण सामग्री (TLM) तैयार की जाएगी, ताकि मूल्यांकन की पद्धति को भी व्यवहारिक बनाया जा सके।

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