उत्तराखंड

अभिभावक और शिक्षक मिलकर बचाएं बचपन; नशामुक्ति कार्यशाला में सीएस ने दी कड़ी चेतावनी।

उत्तराखंड को ड्रग्स फ्री बनाने के संकल्प के साथ मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सचिवालय में एक हाई-प्रोफाइल कार्यशाला की अध्यक्षता की। ‘नशामुक्त उत्तराखंड–नशामुक्त भारत’ अभियान के तहत आयोजित इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी आदेशों से नशा खत्म नहीं होगा; इसके लिए शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों और सिविल सोसाइटी को एक ‘कवच’ की तरह काम करना होगा।

संस्थानों को चेतावनी: “सच्चाई स्वीकारें, छुपाएं नहीं”

मुख्य सचिव ने शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अक्सर संस्थान अपनी छवि खराब होने के डर से छात्र-छात्राओं में नशे की लत की जानकारी छुपाते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि:

  • छवि से बड़ा भविष्य: संस्थान की साख से ज्यादा कीमती बच्चों का जीवन है।

  • नियमित ट्रैकिंग: हॉस्टल और पीजी में रहने वाले छात्रों, खासकर नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

  • एक्शन प्लान: हर संस्थान अपना एक सुदृढ़ एक्शन प्लान बनाए और गलत संगति की पहचान होते ही तुरंत परामर्श (Counseling) शुरू करे।

टोल फ्री नंबर 1933: सूचना तंत्र को करें मजबूत

मुख्य सचिव ने नशे के सौदागरों पर प्रहार करने के लिए सूचना तंत्र को सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि:

  • ड्रग्स से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत टोल फ्री नंबर 1933 पर दी जाए।

  • इसके अलावा जिला प्रशासन, एसटीएफ और एसएसपी कार्यालय को भी सूचित किया जा सकता है।

  • दृष्टिकोण: नशे के आदी युवाओं को अपराधी मानकर दंडित करने के बजाय उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं और काउंसलिंग के जरिए मुख्यधारा में वापस लाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

अभिभावकों की भूमिका और संस्थानों की जवाबदेही

कार्यशाला में इस बात पर चिंता जताई गई कि कई माता-पिता अपने बच्चों की बाहरी गतिविधियों से अनजान रहते हैं।

  • नियमित संवाद: संस्थान अभिभावकों के साथ लगातार संपर्क में रहें और उन्हें बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलावों के प्रति जागरूक करें।

  • कठोर रुख: यदि किसी संस्थान का छात्र सार्वजनिक स्थल पर नशे या अवैध गतिविधियों में पकड़ा जाता है, तो इसके लिए संबंधित संस्थान की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

ड्रग डिटेक्शन किट और एसटीएफ का समन्वय

एसटीएफ एसपी अजय सिंह ने संस्थानों को बताया कि वे कैसे पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। संस्थानों से ड्रग डिटेक्शन किट के उपयोग और जनपद स्तरीय रोडमैप में सहयोग मांगा गया है। बैठक में आईजी नीलेश आनंद भरणे, डीएम सवीन बंसल और एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल समेत कई विशेषज्ञ और एनजीओ प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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