उत्तराखंड

रेलवे अतिक्रमण विवाद: क्या कल थमेगी बनभूलपुरा की बेचैनी? सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा अंतिम निर्णय।

उत्तराखंड के बहुचर्चित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में कल यानी 24 फरवरी का दिन निर्णायक होने वाला है। करीब 30 एकड़ रेलवे भूमि पर बसे हजारों परिवारों के भविष्य पर देश की सर्वोच्च अदालत अपना फैसला सुनाएगी। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल जिला प्रशासन और पुलिस ‘हाई अलर्ट’ पर हैं।

4365 घर और 40 हजार लोग: दांव पर है हजारों की किस्मत

रेलवे का दावा है कि बनभूलपुरा क्षेत्र की 30 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा है।

  • प्रभावित क्षेत्र: इस दायरे में लगभग 4365 भवन आते हैं।

  • जनसंख्या: यहां 40 हजार से अधिक लोग निवास करते हैं, जिनमें अधिकांश आबादी मुस्लिम समुदाय की है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला तय करेगा कि इन घरों पर बुलडोजर चलेगा या वर्षों से रह रहे इन लोगों को राहत मिलेगी।

हल्द्वानी बना अभेद्य किला: आधुनिक हथियारों से लैस जवान

प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  1. बाहरी फोर्स की तैनाती: अन्य जिलों से भारी संख्या में पुलिस बल बुलाया गया है। IRB (इण्डियन रिजर्व बटालियन) और PAC की कई टुकड़ियां हल्द्वानी पहुंच चुकी हैं।

  2. आधुनिक हथियार: सुरक्षा बलों को LMG (लाइट मशीन गन) और अन्य आधुनिक हथियारों से लैस किया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।

  3. रेलवे की मुस्तैदी: रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने भी अपनी अतिरिक्त फोर्स को तैनात कर दिया है।

प्रशासन की अपील: “अदालत के फैसले का सम्मान करें”

सिटी मजिस्ट्रेट ए.पी. बाजपेई ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करना हर नागरिक की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। क्षेत्र में ड्रोन के जरिए भी निगरानी रखी जा रही है और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर कड़ी नजर है।

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