हरियाणा

32 लाख जारी होने के बाद बाकी 1 लाख के लिए मांगे 10 हजार, पटवारी गिरफ्तार

हिसार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने भूमि अधिग्रहण विभाग में पुनर्नियुक्त पटवारी भूप सिंह को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ACB हिसार की टीम ने शिकायत मिलने के बाद नियमानुसार ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।

इस दौरान पटवारी भूप सिंह को शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए मौके पर गिरफ्तार कर लिया गया। मामले के संबंध में थाना एसवी एवं एसीबी, हिसार में बुधवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत केस दर्ज किया गया है। अब जांच एजेंसी पूरे मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता के मामा/फूफा लक्ष्मी नारायण मित्तल के पक्ष में उपायुक्त, हिसार की अदालत ने 33 लाख रुपये की राशि जारी करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के तहत भूमि अधिग्रहण विभाग को संबंधित राशि जारी करनी थी। बताया गया है कि 33 लाख रुपये में से 32 लाख रुपये की राशि भूमि अधिग्रहण विभाग, हिसार की ओर से पहले ही जारी की जा चुकी थी। इसके बाद एक लाख रुपये की शेष राशि जारी करने की प्रक्रिया बाकी थी।

आरोप है कि शेष एक लाख रुपये की राशि जारी करने के एवज में पटवारी भूप सिंह ने शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।

रिश्वत की मांग से परेशान शिकायतकर्ता ने मामले की जानकारी एसीबी हिसार को दी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने मामले की प्रारंभिक जांच की और इसके बाद नियमानुसार ट्रैप कार्रवाई की योजना तैयार की। कार्रवाई के दौरान शिकायतकर्ता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया गया। ट्रैप कार्रवाई के दौरान जैसे ही पटवारी ने शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

एसीबी की कार्रवाई के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 105 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का भी पालन किया गया।

पूरी कार्रवाई नियमानुसार किए जाने की बात जांच एजेंसी की ओर से कही गई है। आरोपी पटवारी को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब मामले में आगे की जांच जारी है। जांच एजेंसी रिश्वत की मांग और भूमि अधिग्रहण से संबंधित भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच कर रही है। इस कार्रवाई के बाद एसीबी ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सरकारी काम करवाने के बदले रिश्वत मांगने वाले कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले में जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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