पंजाब

सवा तीन लाख कर्मचारी और चार लाख पेंशनर के हक की लड़ाई, पंजाब में आज बड़ा प्रदर्शन

बकाया महंगाई भत्ते (DA), पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली समेत कई मांगों को लेकर पंजाब के सरकारी कर्मचारी आज कामकाज ठप कर सांकेतिक भूख हड़ताल और प्रदर्शन करेंगे। कर्मचारियों के आंदोलन के चलते सरकारी दफ्तरों का काम प्रभावित होने की संभावना है। कर्मचारियों की ओर से सभी जिलों के डीसी कार्यालयों, विभिन्न निदेशालयों और सचिवालय स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस आंदोलन को एक दिन की पेन डाउन हड़ताल के तौर पर किया जा रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा।

पेन डाउन हड़ताल के बाद संयुक्त कार्रवाई कमेटी की बैठक होगी। इसमें आंदोलन के अगले चरण को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी। कर्मचारी नेताओं के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर विधायकों और मंत्रियों के आवास का घेराव भी किया जा सकता है। इस बीच आंदोलन से जुड़े कर्मचारी नेताओं के तबादलों का मुद्दा भी सामने आया है। कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि आंदोलन में सक्रिय नेताओं को अलग-अलग जगहों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि तबादलों से उनका आंदोलन कमजोर नहीं होगा। उनका दावा है कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं और सरकार के इस तरह के कदमों से संघर्ष पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वहीं, सरकार की ओर से 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए करीब 85 हजार कर्मचारियों के DA में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रस्ताव के तहत इन कर्मचारियों का DA 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की योजना है।

इस प्रस्ताव को लागू करने पर सरकार के खजाने पर हर साल करीब 900 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। हालांकि, प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मुख्यमंत्री स्तर से मिलनी बाकी है। पीएसएस ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान मंजीत सिंह रंधावा ने कहा कि कर्मचारियों का यह संघर्ष केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, आंदोलन में करीब सवा तीन लाख कर्मचारी और चार लाख पेंशनर जुड़े हुए हैं। मंजीत सिंह रंधावा ने DA बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग वर्गों के कर्मचारियों के लिए अलग फैसले लेकर सरकार कर्मचारियों को बांटने की कोशिश कर रही है। कर्मचारी नेता कुलवंत सिंह ने आंदोलन से जुड़े नेताओं के तबादलों को भी अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि तबादलों के जरिए कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश सफल नहीं होगी और संगठन अपनी मांगों को लेकर आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।

कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांगों में बकाया DA का भुगतान, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और कर्मचारियों से जुड़े अन्य लंबित मुद्दों का समाधान शामिल है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से मांगें उठाए जाने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। अगर बातचीत या मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं होती है तो कर्मचारियों का आंदोलन और व्यापक होने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव और बढ़ सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button