चुनाव से पहले पंजाब में सियासी पारा हाई, इन विवादों को लेकर सरकार घिरी

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कई विवादों ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। अलग-अलग घटनाओं को लेकर विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं। इन मुद्दों के जरिए सरकार को घेरने के साथ-साथ चुनावी समीकरण साधने की कोशिश भी तेज हो गई है। खास बात यह है कि इन मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी दखल दिया है। आयोग ने कई घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया है, जबकि कुछ मामलों में शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए मुख्य सचिव, डीजीपी और संबंधित जिलों के अधिकारियों से जांच रिपोर्ट मांगी गई है। सुनाम के शेरों गांव में मुख्यमंत्री की लोक मिलनी के दौरान मोहनजीत सिंह ने नशे के खिलाफ विरोध जताते हुए छत पर खड़े होकर काला झंडा लहराया था। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। बाद में मोहनजीत ने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर करने के गंभीर आरोप लगाए। मामला सामने आने के बाद भाजपा, शिअद और कांग्रेस नेताओं ने मोहनजीत के समर्थन में आवाज उठाई और पंजाब सरकार को घेरा। राज्यसभा सांसद तरुण चुघ की शिकायत के बाद NHRC ने मुख्य सचिव, डीजीपी, संगरूर के एसएसपी और डीसी से जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। एक अन्य मामले में मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम का कथित तौर पर इस्तेमाल करते हुए दुराचार के आरोपी को बचाने के लिए पांच करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस रणजीत सिंह की शिकायत पर NHRC ने मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट मांगी है। बरनाला में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों पर पुलिस लाठीचार्ज का मामला भी विवादों में है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं समेत कई लोगों पर बल प्रयोग किया गया। NHRC ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए लाठीचार्ज की परिस्थितियों और इसके आदेश से जुड़ी जानकारी मांगी है।
आयोग ने यह भी पूछा है कि लाठीचार्ज का आदेश किस अधिकारी ने दिया था और इसकी मंजूरी किस स्तर से मिली थी। इसके साथ ही घायलों की संख्या, उन्हें आई चोटों, चिकित्सा उपचार और संभावित मुआवजे की जानकारी भी मांगी गई है। पंजाब के सीमावर्ती इलाकों के सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाए जाने के आरोपों ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ाई हैं। मामले को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सरकार का पक्ष सामने रखा। वहीं, NHRC ने मुख्य सचिव से राज्य, जिला और स्कूल स्तर पर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मोगा के एक सरकारी स्कूल में छात्राओं से कथित यौन उत्पीड़न का मामला भी आयोग के संज्ञान में आया है। NHRC ने मामले में मुख्य सचिव और मोगा के एसएसपी को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल के प्रधानाचार्य को निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। रूपनगर में आवारा कुत्तों के हमले में आठ वर्षीय बच्ची की मौत का मामला भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। NHRC ने इस घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पंजाब में आवारा कुत्तों की समस्या और इससे निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है।
इन घटनाओं को लेकर विपक्षी दल लगातार पंजाब सरकार पर निशाना साध रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार कानून-व्यवस्था और आम लोगों से जुड़े गंभीर मुद्दों को संभालने में नाकाम रही है। वहीं, सरकार की ओर से कई मामलों में डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जा रही है। विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएंगे, इन घटनाओं के राजनीतिक मुद्दा बनने की संभावना बढ़ सकती है। NHRC की ओर से मांगी गई रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। ऐसे में पंजाब में चुनावी माहौल के साथ इन विवादों की सियासी गर्मी भी बढ़ने के आसार हैं।




