उत्तराखंड

पनेथ गांव में पुनर्वास की राह में अड़चन, 22 परिवारों ने उठाए सवाल

टिहरी:- उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में ग्राम पंचायत पलास के राजस्व ग्राम पनेथ के 22 परिवार लंबे समय से विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर भूमि विकास, बिजली, पेयजल और किराए से संबंधित लंबित मामलों में जल्द कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष आई आपदा के बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर कई निर्देश दिए गए थे, लेकिन संबंधित कार्य अभी तक पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाए हैं।

आपदा के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया अधूरी

ग्रामीणों के मुताबिक 22 सितंबर 2025 को तत्कालीन/जिला प्रशासन की ओर से गांव का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान प्रभावित परिवारों को ‘बाड़यों नामे तोक’ में पट्टे की भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि भूमि से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद पुनर्वास की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।

भूमि समतलीकरण का काम शुरू होने का इंतजार

विस्थापन के लिए चिन्हित भूमि के समतलीकरण का मामला भी लंबित बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस संबंध में लोक निर्माण विभाग चंबा को निर्देश दिए गए थे, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। उनका कहना है कि भूमि का विकास और समतलीकरण नहीं होने के कारण विस्थापन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

बिजली-पानी की व्यवस्था भी बनी चुनौती

आपदा प्रभावित क्षेत्र में बिजली और पेयजल की सुविधा को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। विद्युत आपूर्ति के लिए विद्युत विभाग चंबा और पेयजल व्यवस्था के लिए जल संस्थान चंबा को जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों सुविधाओं को लेकर अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

सुरक्षित स्थानों पर रह रहे परिवारों को किराए का इंतजार

आपदा के दौरान सुरक्षा को देखते हुए कुछ परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया था। ग्रामीणों के मुताबिक इन परिवारों को कमरे के किराए की राशि भी अब तक नहीं मिल पाई है। इससे प्रभावित परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

बजट मिलते ही विस्थापन की प्रक्रिया पूरी करने का दावा

इस मामले में टिहरी की जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने बताया कि उन्होंने करीब आठ महीने पहले पनेथ गांव का दौरा किया था। उनके अनुसार ग्रामीणों के विस्थापन की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन जिस भूमि पर उन्हें विस्थापित किया जाना है, वहां ग्रामीण विकास कार्य चाहते हैं। इसके लिए अतिरिक्त लागत आएगी। डीएम ने बताया कि इस संबंध में लोक निर्माण विभाग समेत संबंधित विभागों को पत्र भेजा जा चुका है। बजट उपलब्ध होने के बाद ग्रामीणों के विस्थापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। फिलहाल पनेथ के 22 परिवार प्रशासन से स्थायी समाधान, सुरक्षित पुनर्वास और जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

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