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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के चुनिंदा बड़े मर्चेंट लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। वित्त मंत्रालय ने उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि यह फैसला अमेरिकी दबाव में लिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक, UPI से जुड़े शुल्क का नया ढांचा भारत में डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की 2026 की रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों के संदर्भ में भी स्पष्टीकरण दिया है। सरकार ने कहा कि NPCI के 15 सितंबर के दिशानिर्देशों में UPI पर क्रेडिट कार्ड से जुड़े लेनदेन के लिए केवल RuPay क्रेडिट कार्ड की अनुमति है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इसलिए यह कहना सही नहीं है कि नए MDR ढांचे से विदेशी क्रेडिट कार्ड कंपनियों को कोई विशेष फायदा दिया गया है। सरकार ने कहा है कि MDR से जुड़े फैसले किसी बाहरी दबाव के कारण नहीं लिए गए हैं। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यह व्यवस्था UPI के लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार करने और डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से लाई गई है।

15 अक्टूबर से लागू होंगे नए MDR नियम

NPCI के नए ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इस शुल्क का भुगतान व्यापारी पक्ष करेगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। आम लोगों के बीच होने वाले Person-to-Person (P2P) UPI लेनदेन पर इस बदलाव का असर नहीं पड़ेगा। यानी किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने के लिए MDR नहीं देना होगा। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान भी इस शुल्क से बाहर रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।

जरूरी सेवाओं के लिए 5 रुपये का फ्लैट शुल्क

नए नियमों में कुछ आवश्यक सेवाओं के लिए अलग शुल्क व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, टेलीकॉम, ईंधन और बीमा जैसे निर्धारित क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य इन सेवाओं के भुगतान पर प्रतिशत आधारित शुल्क के मुकाबले अलग व्यवस्था रखना है। वहीं म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकिंग जैसे पूंजी बाजार से जुड़े UPI लेनदेन के लिए 0.02 प्रतिशत MDR तय किया गया है। इन लेनदेन पर भी अधिकतम शुल्क 300 रुपये तक सीमित रहेगा।

छोटे व्यापारियों को मिलेगी छूट

नए ढांचे में छोटे कारोबारियों को भी राहत दी गई है। UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक का कलेक्शन करने वाले पात्र छोटे व्यापारी MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार और NPCI का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान की पहुंच बनाए रखना और UPI के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR सरकार की ओर से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। यह भुगतान इकोसिस्टम में शामिल बैंकों और पेमेंट ऐप प्रदाताओं समेत विभिन्न हिस्सेदारों के बीच वितरित किया जाता है। सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था UPI के संचालन, विस्तार और बुनियादी ढांचे को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए तैयार की गई है। इस फैसले को लेकर विपक्ष और कुछ कारोबारी संगठनों ने सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार ने अमेरिकी दबाव से जुड़े आरोपों को गलत बताया है। ऐसे में 15 अक्टूबर से लागू होने वाली नई MDR व्यवस्था का वास्तविक असर मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट भुगतान और संबंधित कारोबारी क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा।

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