जन्माष्टमी पर भक्तिमय हुई कान्हा की नगरी, CM योगी ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर किया पूजन

मथुरा:- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मथुरा में शुक्रवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 10 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही जन्मस्थान परिसर जय श्रीकृष्ण और राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री करीब 30 मिनट तक श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में रहे। यहां पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले गोप पूजन किया। इसके बाद वह भागवत भवन पहुंचे, जहां भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
श्रद्धालुओं पर की पुष्प वर्षा
जन्माष्टमी के मौके पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचे श्रद्धालुओं में मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा कर उन्हें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री की ओर से पुष्प वर्षा होते ही श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया। पूरा परिसर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजने लगा और माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
सनातन संस्कृति पर बोले सीएम योगी
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत पर इतिहास में कई बार आक्रमण हुए और देश की संस्कृति व सनातन परंपराओं को कमजोर करने के प्रयास भी किए गए। इसके बावजूद सनातन आस्था और विश्वास को कोई डिगा नहीं सका। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक शक्ति का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचता है।
जन्माष्टमी पर मथुरा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा पहुंचे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए जन्मस्थान परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे। जन्मस्थान की ओर जाने वाले मार्गों पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। मुख्यमंत्री के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ ही कान्हा की जन्मभूमि पर जन्माष्टमी का धार्मिक उत्साह और बढ़ गया।




