उत्तराखंड

घर में तलाशी लेने पहुंची आबकारी टीम, ग्रामीणों ने कार्रवाई के तरीके पर जताई नाराजगी

पौड़ी:-  कल्जीखाल विकासखंड के दिवई गांव में आबकारी विभाग की कथित छापेमारी को लेकर विवाद सामने आया है। एक ग्रामीण के घर पर विभागीय टीम की ओर से तलाशी लिए जाने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए हैं। मामले में ग्रामीणों ने पौड़ी पहुंचकर जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया से मुलाकात की और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

10 सितंबर को गांव पहुंची थी टीम

ग्रामीणों के अनुसार, 10 सितंबर को आबकारी विभाग की टीम दिवई गांव पहुंची थी। बताया गया कि टीम किसी व्यक्ति की तलाश में गांव आई थी। इसके बाद टीम गौरव पटवाल उर्फ गोलू के घर पहुंची और वहां तलाशी ली। परिजनों का कहना है कि टीम में करीब 7 से 8 लोग शामिल थे, जिनमें एक महिला भी थी। टीम ने घर में शराब या अन्य आपत्तिजनक सामग्री होने की सूचना के आधार पर तलाशी ली। हालांकि, ग्रामीणों के मुताबिक तलाशी के दौरान ऐसा कोई सामान नहीं मिला और टीम वापस लौट गई।

2021 से देहरादून में रह रहा परिवार

गौरव पटवाल का कहना है कि वह वर्ष 2021 से अपने परिवार के साथ देहरादून में रह रहे हैं और गांव स्थित घर पर केवल त्योहारों के दौरान आते हैं। उनके मुताबिक, गांव के मकान में उनके बुजुर्ग माता-पिता और चचेरी बहन रहती हैं। गौरव ने सवाल उठाया कि जब वह पिछले कई वर्षों से देहरादून में रह रहे हैं, तो गांव स्थित उनके घर पर अचानक आबकारी विभाग की टीम किस आधार पर पहुंची और तलाशी क्यों ली गई।

कार्रवाई के तरीके पर उठाए सवाल

घटना के बाद गौरव पटवाल ने एक वीडियो जारी कर आबकारी विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि टीम किसी सूचना के आधार पर उनके घर पहुंची, लेकिन परिवार को कार्रवाई के संबंध में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। गौरव के मुताबिक, यदि विभाग को किसी तरह की शिकायत या सूचना मिली थी तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शिकायत किस व्यक्ति ने की थी और उसके आधार पर घर की तलाशी लेने का आधार क्या था। परिजनों सुरेंद्र सिंह पटवाल और अर्जुन पटवाल का आरोप है कि टीम ने अचानक घर पहुंचकर तलाशी शुरू कर दी। उनका कहना है कि इस दौरान घर का सामान इधर-उधर हो गया। जब गौरव के पिता ने कार्रवाई का कारण पूछा तो उन्हें शिकायत मिलने की बात बताई गई।

सर्च वारंट और पहचान पत्र नहीं दिखाने का आरोप

परिजनों ने आरोप लगाया कि तलाशी के दौरान टीम की ओर से उन्हें सर्च वारंट नहीं दिखाया गया। उनका यह भी दावा है कि टीम में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपना परिचय पत्र नहीं दिखाया। इन्हीं आरोपों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

डीएम कार्यालय पहुंचे ग्रामीण

घटना के बाद 14 सितंबर को गौरव पटवाल के परिजन और क्षेत्र के ग्रामीण पौड़ी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। ग्रामीणों ने मांग की कि आबकारी विभाग को सूचना देने वाले व्यक्ति की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि विभागीय टीम किस सूचना के आधार पर दिवई गांव पहुंची और किस आधार पर संबंधित घर की तलाशी ली गई।

गलत सूचना देने वाले पर भी कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग को दी गई सूचना गलत पाई जाती है तो सूचना देने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि जांच में विभागीय कार्रवाई के दौरान नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने ग्रामीणों को मामले की जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

डीएम ने क्या कहा?

जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने कहा कि कल्जीखाल ब्लॉक से आए ग्रामीणों ने उनके सामने पूरा मामला रखा है। प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका दोषपूर्ण पाए जाने पर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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