उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार से जोड़ने और उनके लिए देश-विदेश में नए अवसर विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल शुरू कर दी है। इस योजना के तहत प्रदेश के युवाओं को विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ राज्य के भीतर ही स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए युवाओं को उनकी योग्यता और रोजगार बाजार की मांग के अनुसार कौशल प्रशिक्षण देने की योजना पर काम किया जा रहा है।
इस संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में स्टेट स्टीयरिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रस्तावित योजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों और संबंधित कंपनी की ओर से योजना का प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें बताया गया कि किस प्रकार उत्तराखंड के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार से जोड़ने के साथ स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए विकल्प उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
रोजगार की मांग के अनुसार मिलेगा कौशल प्रशिक्षण
बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट किया कि किसी भी रोजगारपरक योजना को लागू करने से पहले उसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करना जरूरी है। उन्होंने संबंधित कंपनी और अधिकारियों को योजना के आर्थिक, तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन कर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने विशेष रूप से योजना के रेवेन्यू मॉडल को स्पष्ट करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह तय होना चाहिए कि इस पहल के माध्यम से कितने युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा सकेगा और उन्हें किन क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिकता तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें वास्तविक रोजगार बाजार की जरूरतों के आधार पर तैयार किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने प्रशिक्षण के लिए अनुभवी और योग्य ट्रेनर्स की व्यवस्था करने तथा प्रशिक्षण पूरा होने के बाद युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए प्रभावी प्लेसमेंट सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए।
विदेशों में रोजगार के साथ स्थानीय स्वरोजगार पर भी जोर
प्रस्तावित पहल का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तराखंड के युवाओं को विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों तक पहुंच प्रदान करना है। इसके लिए अलग-अलग देशों में मौजूद रोजगार की संभावनाओं और वहां की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई जा रही है। वहीं, जो युवा अपने प्रदेश में रहकर काम करना चाहते हैं, उनके लिए भी स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के विकल्प विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत कौशल विकास और प्रशिक्षण को आजीविका के अवसरों से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि युवाओं को ऐसा प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, जिससे वे प्रशिक्षण पूरा करने के बाद रोजगार प्राप्त कर सकें या स्वयं का काम शुरू करने में सक्षम बनें।
महिलाओं को भी मिलेंगे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर
बैठक में महिला सशक्तिकरण को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि रोजगार और कौशल प्रशिक्षण की इस पहल में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। महिलाओं को भी उनकी रुचि, योग्यता और बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इसके माध्यम से महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार शुरू करने और देश-विदेश में नौकरी पाने के रास्ते विकसित करने पर जोर दिया गया।
समयसीमा के भीतर पूरी होंगी सभी प्रक्रियाएं
मुख्य सचिव ने संबंधित कंपनी को योजना से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गतिविधि के लिए स्पष्ट टाइमलाइन बनाई जाए और उसकी नियमित समीक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सभी संबंधित विभागों, कंपनी और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए एक विस्तृत वर्कशॉप आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी पक्षों की जिम्मेदारियां और कार्यप्रणाली स्पष्ट हो सके। नेशनल स्टीयरिंग कमेटी से लेना होगा अनुमोदन
बैठक में मुख्य सचिव ने प्रस्तावित योजना को आगे बढ़ाने के लिए नेशनल स्टीयरिंग कमेटी से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण व्यवस्था, प्रशिक्षकों की उपलब्धता, रोजगार की वास्तविक मांग और प्लेसमेंट की प्रक्रिया समेत सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को कार्ययोजना में शामिल किया जाए।
फिलहाल यह पहल प्रस्ताव और कार्ययोजना तैयार करने के चरण में है। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसके तहत कुल कितने युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा, किन देशों में नौकरी के अवसर मिलेंगे और प्रशिक्षण के लिए किन क्षेत्रों का चयन होगा। विस्तृत कार्ययोजना और आवश्यक अनुमोदन के बाद इन सभी बिंदुओं पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। यदि योजना निर्धारित रूपरेखा के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे उत्तराखंड के युवाओं को विदेशों में नौकरी पाने के साथ-साथ अपने ही प्रदेश में स्वरोजगार के नए विकल्प तलाशने का अवसर मिल सकता है।