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West Bengal Politics: TMC नाम-सिंबल विवाद पर राहुल गांधी और केजरीवाल का EC पर निशाना

नई दिल्ली:- ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग की अंतरिम रोक के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि भारत में अब ‘वोट चोरी’ और ‘सरकार चोरी’ के साथ ‘पार्टी चोरी’ भी लोकतांत्रिक गिरावट की पहचान बनती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और चुनाव आयोग विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ये आरोप राहुल गांधी के राजनीतिक बयान हैं।

‘पहले शिवसेना, फिर NCP और अब TMC’

राहुल गांधी ने अपने बयान में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के बाद अब तृणमूल कांग्रेस को लेकर उठे विवाद का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हर मामले में एक जैसा पैटर्न दिखाई देता है—पहले किसी पार्टी में विभाजन होता है और उसके बाद उसके चुनाव चिह्न पर विवाद खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी राजनीतिक दल के नाम और पहचान को लेकर ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है, तो वोट और सरकार को लेकर उठाए जा रहे सवालों को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

चुनाव आयोग पर भी राहुल गांधी ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग मतदाताओं और जनादेश की रक्षा करने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में विफल हो रहा है। उनके मुताबिक, आयोग को जनता के जनादेश की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय वह उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो उनके आरोप के अनुसार चुनावी फैसलों को प्रभावित या पलटने की कोशिश करती हैं। राहुल गांधी ने इसे सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ा मुद्दा नहीं बताया। उन्होंने कहा कि यह उन सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं का मामला है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की अपेक्षा रखते हैं।

क्या है चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश?

चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद के बीच अंतरिम आदेश जारी किया। आयोग ने कहा कि उसके सामने पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं—एक ममता बनर्जी के नेतृत्व में और दूसरा अरूप रॉय के नेतृत्व में। दोनों ही गुट खुद को मान्यता प्राप्त पार्टी का प्रतिनिधि बता रहे हैं। आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और आरक्षित ‘फूल और घास’ (Flowers & Grass) चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यह व्यवस्था अंतिम निर्णय होने तक लागू रहेगी।

दोनों गुटों से मांगे गए नए नाम और चुनाव चिह्न

अंतरिम व्यवस्था के तहत चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा है। प्रत्येक गुट को तीन पसंदीदा नाम और तीन फ्री चुनाव चिह्न बताने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग उपलब्ध विकल्पों में से किसी नाम और चिह्न को मंजूरी दे सकता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम फैसला नहीं है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय Election Symbols (Reservation & Allotment) Order, 1968 के पैरा 15 के तहत आगे की प्रक्रिया के बाद लिया जाना है।

अरविंद केजरीवाल ने भी साधा निशाना

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी चुनाव आयोग के फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए सवालिया अंदाज में पूछा कि क्या इसी तरह चुनाव जीते जाएंगे। यह प्रतिक्रिया पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर प्रस्तावित उपचुनाव की पृष्ठभूमि में आई है। दोनों सीटों पर उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर की तारीख तय की है।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला बाकी

फिलहाल चुनाव आयोग का आदेश अंतरिम है। आयोग के मुताबिक, दोनों पक्षों के दावों पर विस्तृत प्रक्रिया के बाद ही यह तय किया जाएगा कि पार्टी के मूल नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर किसका दावा स्वीकार किया जाएगा। तब तक दोनों गुटों को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ उपचुनाव में आगे बढ़ना होगा।

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