दिल्ली बिल्डिंग हादसे में 6 मौतें, इमारत पहले से थी खतरनाक; मालिक पर FIR के निर्देश

नई दिल्ली:- दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में जर्जर इमारत का एक हिस्सा गिरने से बड़ा हादसा हो गया। राहत और बचाव अभियान के दौरान मलबे से एक और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या छह हो गई है। हादसे के बाद भी बचाव दल मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के दबे होने की आशंका को देखते हुए सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए है। इमारत गिरने की पूरी घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि देखते ही देखते इमारत का हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया और आसपास अफरा-तफरी मच गई।
40-50 साल पुरानी थी इमारत
दिल्ली पुलिस की शुरुआती स्थानीय जांच के मुताबिक हादसे वाली इमारत करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी थी। भवन में बेसमेंट के साथ पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल PG आवास के तौर पर किया जा रहा था। बताया गया है कि हादसे के वक्त बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक इमारत का हिस्सा ढह गया और वहां मौजूद लोग मलबे में फंस गए।
पुलिस और बचाव एजेंसियों ने संभाला मोर्चा
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, कैट एंबुलेंस और अन्य राहत एवं बचाव एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। इसके बाद मलबा हटाने का अभियान शुरू किया गया। रेस्क्यू टीमों ने कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। एम्स के जेपीएन एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में कुल 10 मरीजों को लाया गया था। इनमें चार लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल एक मरीज ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल में भर्ती अन्य घायलों का इलाज किया गया। एक मरीज की अंग संबंधी चोट की सर्जरी भी की गई, जबकि मामूली चोट वाले एक मरीज को निगरानी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं सफदरजंग अस्पताल में भर्ती 19 वर्षीय युवक की हालत स्थिर बताई गई है।
MCD के पुराने आदेश ने बढ़ाए सवाल
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम यानी MCD की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सामने आए निगम के आदेश के अनुसार, सत्य निकेतन स्थित भवन संख्या-13 को पहले ही जर्जर और खतरनाक घोषित किया जा चुका था। MCD ने संपत्ति के मालिक या कब्जाधारी को भवन को तीन दिनों के भीतर खुद ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। आदेश में भवन की स्थिति को बेहद जर्जर और खतरनाक बताते हुए कहा गया था कि इससे वहां रहने वाले लोगों के अलावा आसपास आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा को भी खतरा है। निगम ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 348 और 491 के तहत कार्रवाई करते हुए भवन को निर्धारित समय में गिराने का आदेश दिया था।
समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो हादसा?
MCD के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि अगर संबंधित पक्ष निर्धारित समयसीमा में भवन को खुद नहीं गिराता है, तो नगर निगम अपनी ओर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। साथ ही इस कार्रवाई में आने वाले खर्च को संबंधित व्यक्ति से नगर निगम के बकाये की तरह वसूलने की बात कही गई थी। अब हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जर्जर घोषित किए जा चुके भवन को समय रहते खाली और ध्वस्त क्यों नहीं कराया गया।
CM रेखा गुप्ता ने लिया जायजा
हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से मौके की स्थिति और रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने शुरुआती आकलन के आधार पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही इमारत के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जांच में तय होगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसकी जवाबदेही तय की जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब मजिस्ट्रियल जांच में इमारत की जर्जर स्थिति, बेसमेंट में चल रहा मरम्मत कार्य, सुरक्षा मानकों के पालन और प्रशासनिक स्तर पर हुई कार्रवाई समेत हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।




