हिमाचल प्रदेश

बैरा स्यूल जल विद्युत परियोजना का भविष्य अधर में, नियंत्रण लेने का इंतजार बढ़ा

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 180 मेगावाट के बैरा स्यूल हाइड्रो पावर परियोजना को अपने नियंत्रण में लेने के कदम पर लगाई रोक चार सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने एनएचपीसी की याचिका की सुनवाई के पश्चात यह आदेश जारी किए। इस मामले में हाई कोर्ट ने 22 अप्रैल को एनएचपीसी को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए राज्य सरकार के मंत्रिमंडल के फैसले पर अमल करने पर रोक लगाई थी। राज्य और केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय भी दिया गया था। दोनों सरकारें अपना जवाब दायर नहीं कर सकीं, इसलिए कोर्ट ने अंतरिम राहत का समय बढ़ाने के आदेश जारी किए। इस परियोजना का संचालन वर्तमान में राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) द्वारा किया जा रहा है। याचिका में राज्य सरकार द्वारा परियोजना को पुन: प्राप्त करने के प्रयास को चुनौती दी गई है।
कोर्ट ने बैरा स्यूल हाइड्रोइलेक्ट्रिक 180 मेगावाट परियोजना के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश पारित किए हैं। अदालत के आदेश में कहा गया है कि विवादित परियोजना के संबंध में दिनांक 26 मार्च, 2025 का संचार और मंत्रिमंडल का निर्णय अगले आदेश तक प्रभावी नहीं होगा। 1980-81 में शुरू हुई बैरा स्यूल परियोजना को मूल रूप से प्रारंभिक समझौते की शर्तों के अनुसार 40 वर्षों के संचालन के बाद राज्य सरकार को वापस सौंप दिया जाना था। इस अवधि के पूरा होने के बाद, राज्य सरकार ने परियोजना पर नियंत्रण हासिल करने के लिए कदम उठाए। हालांकि, एनएचपीसी ने इस कदम का विरोध किया है और अगस्त 2021 में संयंत्र का आधुनिकीकरण करने के आधार पर स्थायी स्वामित्व का दावा किया है।

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